नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में संशोधन करते हुए कहा कि जनता दल (यू) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव को वेतन, भत्ते, एयर और रेल टिकट जैसी अन्य सुविधाएं नहीं मिलेंगी। हालांकि उन्हें 12 जुलाई तक मोहलत दी गई है। न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अवकाशकालीन पीठ ने शरद यादव को नई दिल्ली स्थित सरकारी बंगले में रहने की अनुमति देने के हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर गुरुवार को यह फैसला सुनाया। इसके पूर्व शीर्ष अदालत ने 18 मई को जदयू के राज्य सभा सांसद रामचंद्र प्रसाद सिंह की याचिका पर शरद यादव को नोटिस जारी किया था। बता दें कि रामचंद्र प्रसाद सिंह ने दिल्ली उच्च न्यायालय के पिछले साल 15 दिसंबर के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में हाई कोर्ट ने राज्य सभा के सदस्य के रूप में शरद यादव की अयोग्यता पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया था और उन्हें अपना वेतन, भत्ते लेने तथा यह याचिका लंबित होने तक सरकारी आवास में रहने की अनुमति प्रदान कर दी थी। हाई कोर्ट ने शरद यादव द्वारा अपनी अयोग्यता को विभिन्न आधार पर चुनौती देने वाली याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया था। जदयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पिछले 7 जुलाई में राजद और कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़कर भाजपा से हाथ मिलाने पर शरद यादव और अनवर अली विपक्ष के साथ मिल गये थे। राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने चार दिसंबर को दोनों राज्य सभा सदस्यों को अयोग्य घोषित कर दिया था। रामचंद्र प्रसाद सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट में दोनों को अयोग्य करार देने का अनुरोध करते हुए कहा था कि उन्होंने पार्टी के निर्देश का उल्लंघन करते हुए पटना में विपक्षी दलों की सभा में शिरकत की थी।