रायपुर। हमने जिस भूमि में जन्म लिया है, उस भूमि के प्रति लगाव होना आवश्यक है और यही राष्ट्रीयता है। राष्ट्रीयता हमारी पहचान है। भारत का मुस्लिम भी यदि अरब देश में जाता है तो उसे भारतीय मुस्लिम के रूप में जाना जाता है। नागरिको ंमें राष्ट्रीयता का भाव शिक्षा के माध्यम से जगाया जा सकता है। यह तमाम बातें पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला एवं सरस्वती शिक्षा संस्थान, छत्तीसगढ़ प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में ‘वर्तमान परिवेश में राष्ट्रीयता: आवश्यकता एवं चुनौतियाँ’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम दिवस विद्वानों ने कहीं। संगोष्ठी के सह-संयोजक पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय समाजशास्त्र अध्ययनशाला के सहायक प्राध्यापक डॉ. लुकेश्वर सिंह गजपाल ने बताया कि राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप थे। मुख्य वक्ता विद्या भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गोविन्द प्रसाद शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीयता का भाव है जो बच्चा अपने आस-पास की मिट्टी, पेड़-पौधे और वातावरण से सीखता है। राष्ट्रीयता के समक्ष जो आज सबसे बड़ी चुनौती है, वह है जातिगत अस्मिता, नक्सलवाद। हम जिस भूमि में जन्में हैं, उसके प्रति हमें लगाव होना आवश्यक है, अपनी भूमि के प्रति समर्पण ही राष्ट्रीयता है। अध्यक्षता करते हुए बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गौरीदत्त शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीयता हमारी पहचान है, भारत का मुस्लिम यदि अरब देश में भी जाता है, तो उसे भारतीय मुस्लिम के रूप में जाना जाता है। राष्ट्रीयता के महत्व से कोई भी इनकार नहीं कर सकता।