जयपुर। प्राचीन हिंदू मंत्रों के पीछे छिपे विज्ञान को समझने के लिए राजस्थान सरकार का शोध संस्थान तैयार है। यह देश में अपनी तरह का पहला संस्थान है और जल्द ही इसमें कामकाज शुरू होने जा रहा है। इस संस्थान को बनाने का उद्देश्य वेदों के जरिए ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों को पता लगाना और मधुमेह, ब्लड प्रेशर तथा कैंसर जैसी बीमारियों का स्थायी निदान तलाश करना है। सोमवार को जगद्गुरु रामनंदाचार्य राजस्थान संस्कृत यूनिवर्सिटी के तहत स्थापित राजस्थान मंत्र प्रतिष्ठान ने शिक्षकों समेत विभिन्न पदों के लिए योग्य उम्मीदवारों का आवेदन मांगा है। वर्ष 2005 में राज्य के तत्कालीन शिक्षामंत्री घनश्याम तिवारी ने इस प्रतिष्ठान का प्रस्ताव दिया था। मनुस्मृति से प्रेरित इस प्रस्ताव की संकल्पना को विधानसभा में पेश करते हुए उन्होंने कहा था, हर चीज का समाधान वेद में है। वर्ष 2015-16 में वसुंधरा राजे सरकार ने यूनिवर्सिटी कैंपस में संस्थान की बिल्डिंग बनाने के लिए 24 करोड़ रुपये जारी किए थे। संस्थान के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है और शिक्षाविदों का मानना है कि वर्ष 2018 में यह काम करने लगेगा। संस्थान की संरक्षक और राजस्थान संस्कृत अकादमी की चेयरपर्सन जया दवे ने कहा कि यह संस्थान लुप्त हो चुके भारत के प्राचीन ज्ञान को फिर से हासिल करने का प्रयास करेगा। संस्थान के उद्देश्यों के बारे में उन्होंने कहा, वेद, उपनिषद, आरण्यक और अन्य प्राचीन पुस्तकों में ब्रह्मांड के हर सवाल का जवाब है। आयुर्वेद, धनुर्वेद और शिल्पा वेद पर शोध किया जाएगा।