रायपुर। राष्ट्रीय कृषि मेले में लगी किसानों की पाठशालाओं के प्रति किसानों में जबर्दस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। मेले में पांच पाठशालाएं चल रही हैं। इन पाठशालाओं में किसानों ने गुरुवार को मृदा स्वास्थ्य एवं मिट्टी परीक्षण, सब्जियों की उन्नत तकनीक व मूल्य संवर्धन, छत्तीसगढ़ में पीली क्रांति-तिलहन उत्पादन, पशु प्रजनन प्रबंधन, दूध एवं मछली उत्पादन के पाठ पढ़े। पहले पाठशाला में विशेषज्ञों ने मिट्टी स्वास्थ्य के महत्व, सफल फसल उत्पादन में मिट्टी स्वास्थ्य की उपयोगिता, मिट्टी स्वास्थ्य में जैविक उर्वरकों की उपयोगिता तथा मिट्टी नमूना लेने के तरीके तथा मिट्टी स्वास्थ्य पत्रक तैयार की प्रक्रिया के बारे में बताया। दूसरी पाठशाला में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण सब्जियों की उन्नत तकनीक, ग्राफ्टिंग द्वारा सोलेनेसी कुल की सब्जियों में अधिक उत्पादन एवं रोग प्रबंधन, महत्वपूर्ण सब्जियों में पौध उत्पादन एवं नर्सरी प्रबंधन, महत्वपूर्ण सब्जियों का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन तथा सब्जियों की निर्यात की संभावनाओं की चर्चा हुई। कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने राष्ट्रीय कृषि मेले की प्रदर्शनियों का अवलोकन किया। उन्होंने किसान विकास समिति ग्राम गोटूलमुंडा विकासखण्ड दुर्गुकोंदल जिला कांकेर के देशी पारंपरिक बीजों के जैविक कृषि प्रदर्शनी केन्द्र में पहुंचकर स्टाल में रखे गए विभिन्न प्रजाति के खाद्यान्नों के देशी बीजों को देखा। श्री अग्रवाल ने समिति के सदस्य महिलाओं से इन बीजों के बारे में जानकारी ली। श्री अग्रवाल ने जैविक पद्धति से साग-सब्जियों और मसाला फसलों के उत्पादों का अवलोकन भी किया।